5 services of Sonipat Metropolitan Development Authority come under the purview of Right सोनीपत महानगर विकास प्राधिकरण की 5 सेवाएं सेवा का अधिकार अधिनियम के दाय

सोनीपत महानगर विकास प्राधिकरण की 5 सेवाएं सेवा का अधिकार अधिनियम के दायरे में

awasthi

5 services of Sonipat Metropolitan Development Authority come under the purview of Right

हरियाणा सरकार ने नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक और अहम कदम उठाया है। सरकार ने सोनीपत महानगर विकास प्राधिकरण (एसएमडीए) की पांच सेवाओं को हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम, 2014 के दायरे में शामिल करते हुए इनके लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित कर दी है।

इस संबंध में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा अधिसूचना जारी की गई है।

CLU और भवन योजनाओं के लिए तय समय-सीमा

अधिसूचना के अनुसार, सोनीपत महानगर विकास प्राधिकरण क्षेत्र के भीतर स्थित इकाइयों के लिए—

  • सीएलयू (भूमि उपयोग परिवर्तन) अनुमति

    • सभी आवश्यक दस्तावेज प्राप्त होने की तिथि से 60 दिन

    • (सरकार की सक्षमता से संबंधित मामलों को छोड़कर)

  • सीएलयू प्राप्त स्थलों की भवन योजनाओं की स्वीकृति

    • 90 दिन की समय-सीमा तय की गई है

कब्जा प्रमाण-पत्र के लिए भी तय अवधि

  • कब्जा प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए—

    • अपराध की संलिप्तता न होने पर: 60 दिन

    • अपराध की संलिप्तता होने की स्थिति में: 90 दिन

इन सेवाओं के लिए जिला नगर योजनाकार अथवा वरिष्ठ/मुख्य नगर योजनाकार को पदनामित अधिकारी बनाया गया है।

शिकायत निवारण की व्यवस्था

  • प्रथम शिकायत निवारण प्राधिकारी:

    • मुख्य नगर योजनाकार या वरिष्ठ नगर योजनाकार

  • द्वितीय शिकायत निवारण प्राधिकारी:

    • सोनीपत महानगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ)

ईंट-भट्टों और चारकोल भट्टों के लाइसेंस भी शामिल

इसके अतिरिक्त, हरियाणा अनुसूचित सड़क और नियंत्रित क्षेत्र अनियमित विकास प्रतिबंध अधिनियम, 1963 के तहत—

  • ईंट-भट्टों और चारकोल भट्टों के लिए लाइसेंस

    • सभी दस्तावेज प्राप्त होने की तिथि से 30 दिनों के भीतर जारी किए जाएंगे

इस सेवा के लिए—

  • पदनामित अधिकारी: वरिष्ठ नगर योजनाकार

  • प्रथम शिकायत निवारण प्राधिकारी: मुख्य नगर योजनाकार

  • द्वितीय शिकायत निवारण प्राधिकारी: प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी

पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में कदम

सरकार का मानना है कि इन सेवाओं को सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत लाने से पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध कार्यप्रणाली सुनिश्चित होगी। इससे आम नागरिकों, उद्योगों और निवेशकों को राहत मिलेगी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी पर अंकुश लगेगा।